दुकान का उधार खाता कैसे रखें — पैसा डूबने से बचाने के 7 तरीक़े
हर दुकान में उधार चलता है — लेकिन हिसाब की ग़लती या भूल से पैसा डूब जाता है। कुछ आसान आदतें इस नुक़सान को बहुत कम कर देती हैं।
1. हर ग्राहक का अलग खाता
काग़ज़ की एक डायरी में सबका हिसाब मिल-जुल जाता है। हर ग्राहक का अलग लेजर रखें — कब क्या लिया, कब कितना दिया। DukanDesk में हर पार्टी का लेजर अपने आप बनता है।
2. बिल पर ही उधार लिखें
जब माल उधार पर दिया, तो बिल बनाएँ और "प्राप्त" में जितना मिला उतना ही लिखें। बाक़ी अपने आप खाते में चला जाता है। ग्राहक को बिल का PDF WhatsApp पर भेजें — बाद में बहस नहीं होती।
3. उधार की सीमा रखें
हर ग्राहक की एक सीमा तय करें, जैसे ₹5,000। सीमा पार होने पर DukanDesk बिल बनाते समय ही चेतावनी दिखाता है।
4. "कितने दिन से बाक़ी" देखें
रक़म से ज़्यादा ज़रूरी है कितने दिन से बाक़ी है। 30 दिन से पुराना उधार सबसे पहले वसूल करें। DukanDesk की बाक़ी सूची में हर ग्राहक के आगे दिन दिखते हैं।
5. हफ़्ते में एक बार रिमाइंडर
झिझक के कारण लोग याद नहीं दिलाते। हर हफ़्ते एक तय दिन, एक टैप में WhatsApp रिमाइंडर भेजें — विनम्र भाषा में, रक़म के साथ।
6. स्टेटमेंट भेजें
महीने के अंत में ग्राहक को उसका लेजर स्टेटमेंट (PDF) भेजें। साफ़ हिसाब देखकर लोग जल्दी चुकाते हैं।
7. बैकअप ज़रूर लें
फ़ोन खो गया या ख़राब हुआ तो सारा उधार का हिसाब चला जाता है। हफ़्ते में एक बार बैकअप फ़ाइल Google Drive पर रखें।
DukanDesk में यह सब एक जगह है — बिल, खाता, बाक़ी सूची, WhatsApp रिमाइंडर और बैकअप। 7 दिन मुफ़्त आज़माएँ।